कहानी उस शाम की बीते हुए कल और इस आज की...।।
वो शाम उस पल
उन चाँद तारो के बीच शहर के शोर से दूर वो शांत सा माहौल,
शहर को na, पहली बार इतना खामोश देखा था हमने
अंधेरा जो अक्सर डराता है, वो भी उस दिन एक सुकून सा दे रहा था
मानो कुछ कह रहा हो, कह रहा हो कि- " कुछ पल थोड़ा और ठहर जाओ
अभी तो आये हो"......
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लगता था उस पल जैसे वक़्त थम सा गया हो..दुनियादारी से दूर सारी दिक्कत परेशानियों को भूल बस हम दोनों और हमारी बाते ......,
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इसी बीच अपना सर मेरे काँधे पर रखना...हाथो में हाथ लिए बस एक सवाल करना.....
कि "साथ रहोगे न हमेशा"
और मेरा जवाब "हाँ हु na रहूँगा भी"
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कुछ इसी तरह वो लम्हा बीतता और इस दौरान वो अक्सर सो भी जाया करती
Disturb ना हो उसे इसलिए मैं भी खामोश हो जाता
चेहरे पर आते उसके ज़ुल्फो को आहिस्ते से उसके कान के पीछे सटा देता ,
फिर अपनी इन आँखों से उस पल को उसी में जीता और मन ही मन ख्याल आता कि...
"इससे भी खूबसूरत कुछ है क्या"
.
शायद उस रोज़ मैंने कुछ खूबसूरत सा महसूस तो किया था पर उस से भी खूबसूरत एहसास आज है.. हाँ, आज मैं फिर आया हूँ पर इस दफा अकेले
वो na शायद अपना सवाल खुद ही भूल गयी है या फिर थक गयी हो इस साथ से .
खैर मुझे उससे कोई शिकायत नहीं न खफा हु उससे
.
...
बस अब हर लम्हे को जीता हु
पागल नहीं हु पर खुद से बाते कर लिया करता हु...लिखने भी लगा हु....आखिर उस कल को bhool इस आज को क़ैद कर लु ताकी खो न दु इसे भी मै उस कल की तरह.., .
और एक अलग सी खुशी है इस अकेलेपन में भी...महसूस किया हो किसी ने तो खुद से ही प्यार होने लगता है... ....
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और हाँ,
वो कल भी सही था और ये आज भी सही है
बस फर्क है तो इतना कि...
कल वो थी आज वो नहीं कल सवाल उसका था आज शायद मेरा है
कल जवाब देने वाला मै था पर आज मेरे सवालो का जवाब देने वाली वो नही...🌸
~~~~~~Thank you so much~~~~~~~
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