महज एक ख्वाब ही तो हो तुम✨
उच्च नीच से परे हकीकत से कोसो दूर महज़ एक ख्वाब ही तो हो तुम..! कलम थक चुकी है अब और कितना ही लिखू तुम्हे हर शाम नींद आंखो में लिए बेसुध सा सो जता हु आखिर एक वही तो मिल पाती हो तुम . जाने अंजाने तुम्हारी यादों का असर भी कम हो रहा है अब कुछ कम ही याद आ पाती हो तुम ख्वाबों में ही मौजूद हो बस नजाने मुझमें अब कितनी ज़िंदा हो तुम . कभी जो कोशिश करू करीब आने कि तो नींद खुल सी जाती है ये फासले अब भला क्यों जब महज़ एक ख्वाब ही हो तुम..?❤️