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"Akela nahi hu tum ho kahi" 🌺 post (4)

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रात होते ही सोने की कोशिश में अक्सर करवटे बदलता हु तो महसूस होता है Akela nahi hu , tum ho kahi सुबह  आधी खुली उन आँखों से चाधर में आई उन सिलवटो को देखता हु तो महसूस होता है Akela nahi hu, tum ho kahi कितने फासले आये न हमारे दर्मिया पर भरोसा करो फासला तो कभी था ही न थी तो सिर्फ नाराज़गी.. खैर याद है मुझे की कहा करती थी तुम चली जाऊँगी तो पछताओगे ha sach kehti thi tum..main haar gaya yar Ab to shyd khud se hi Pr  अब भी जब कभी खुद को मायूस पाता हु na तो महसूस होता है  Akela nahi hu tum ho kahi घर के पास वाले पेड़ में जो दो फूल साथ आया करते थे अब उन दो फूलों में भी फासला आ गया ह पर जब झड़ते है तो नीचे जमी पर साथ होते है उन्हे देखता हु तो महसूस होता है Akela nahi hu tum ho kahi वक़्त के साथ बहुत कुछ बीत गया पर मैं आज भी वही हु उसी किनारे इस आश में कि कभी तो आओगी तुम और सुनो इंतज़ार मुझे ही नहीं मेरी हर एक चीज़ को है तुम्हारा Vishwas करो वो घर भी अब घर सा न रहा तो बोलो   घर को फिर हमारा आशियाना बनाओगी क्या बोलो तुम आओगी क्या? जानती हो जब कभी इसका ...